October 18, 2026

‘पद्म भूषण नहीं, PM ही बना दीजिए’ — ज्ञानेश कुमार पर पवन खेड़ा का तंज

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सियासी घमासान जारी है। इसी बीच पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के एक बयान ने राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है।

दरअसल, समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें पद्म भूषण दिए जाने की बात कही।

बीजेपी नेता के इस बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा— पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री ही बना दीजिए।

यानी एक तरफ बीजेपी नेता चुनाव आयोग के कामकाज की तारीफ कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे लेकर सवाल खड़े कर रही है।

क्या कहा था समिक भट्टाचार्य ने?

शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए।

भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि लंबे समय के बाद लोगों को बिना डर के मतदान करने का मौका मिला।

उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान हत्या की कोई घटना नहीं हुई और इसका श्रेय उन्होंने ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज को दिया।

बीजेपी नेता ने मतदाता सूची को लेकर भी दावा किया कि चुनाव आयोग ने सूची की जांच के दौरान अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम हटाने की दिशा में काम किया।

पवन खेड़ा ने दिया करारा जवाब

समिक भट्टाचार्य के इसी बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया दी।

खेड़ा ने व्यंग्य करते हुए कहा—

“पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री ही बना दीजिए।”

पवन खेड़ा का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

SIR पर क्यों छिड़ी है बहस?

SIR के तहत मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है।

इसी बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े तकनीकी सिस्टम जैसे मुद्दे शामिल थे।

Form 6 को लेकर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ी एक नई घोषणा दिखाई दी।

इसमें आवेदक से पूछा गया कि—

क्या उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में दर्ज था?

रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल को अनिवार्य नहीं बताया गया था, लेकिन जवाब दिए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

इसी बदलाव पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति जताई थी और इसे हटाने की मांग की थी।

अब मुद्दा सिर्फ एक बयान का नहीं

एक तरफ बीजेपी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज की तारीफ करते हुए पद्म भूषण देने की मांग कर रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा इस मांग पर ‘PM ही बना दीजिए’ कहकर तंज कस रहे हैं।

और इसी के बीच SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।

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